नया घर -नया मोहल्ला और नई पड़ोसन।
मैं अपने परिवार के साथ एक नए मोहल्ले मे एक नए घर में शिफ्ट हुआ था, वहाँ मेरी अभी कोई जान पहचान नहीं हुई थी और अभी किसी से बोलचाल भी नहीं हुई थी, इसीलिए मैं सुबह ही अपने काम पर निकल जाता और शाम को ऑफिस से आते हुए सीधा अपने घर मे ही चला जाता।
आज शिफ्ट हुए पूरे दो महीने बीतने के बाद मैंने पहली बार अपने घर के बिल्कुल पड़ोस मे अपने गेट से झाँकती एक सुंदर और जवान महिला को देखा, जब मैं अपनी बाइक अपने घर से बाहर निकाल रहा था अपने ऑफिस जाने के लिए।
लेकिन वो महिला शादीशुदा है क्यूंकि मेरी मम्मी की अब उससे जान पहचान हो गई थी, क्यूंकी वो पड़ोसन एक दो बार अपने घर पर बनाए कुछ पकवान मेरे घर पर दे कर गई थी, लेकिन मैंने आज उसे पहली बार देखा था, वो पड़ोसन बहुत सुंदर थी, उसकी जुल्फों की लटें लटकी हुई थी, होंठों पर हल्की हल्की लाल लिपस्टिक लगी हुई है, और उसके होंठ ऐसे थे जैसे रस टपकाने वाला ही हो, और आंखे उसकी ऐसी आकर्षक थी जैसे ही मैंने उसकी आँखों में देखा तो ऐसा लगा जैसे वो मुझे अपने दिल की धड़कने सुनने को कह रही हो,,, और मैं उसे एकटक देखता रह गया, और वो पड़ोसन भी मुझको एकटक देखते हुए अपनी जुल्फ की एक लट को अपने कानों पर चढ़ाती है और अपने घर का गेट बंद कर लेती है।
उसके गेट बंद करते ही मैं थोड़ा सकपकाया और अपनी बाइक स्टार्ट करके अपने ऑफिस को जाने लगा। मैं बाइक चला रहा था और पड़ोसन के ख्यालों मे खोया हुआ था और सोच रहा था ”यार, मेरे मोहल्ले मे इतनी सुंदर लड़की है और मुझे पता तक नहीं!! यार लेकिन वो तो शादीशुदा है,!! लेकिन यार, है बड़ी कमाल की, यार वो काला आदमी ही उसका पति है फिर तो,, बेचारी,, कहाँ फंस गई !!”
मैं अपनी पड़ोसन के बारे मे सोचते-सोचते कब ऑफिस पहुँच गया! मुझे पता ही नहीं चला..।
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मैं शाम होते ही ऑफिस से घर आया और अपने घर के गेट पर पहुँच कर बाइक खड़ी करके बाइक अंदर खड़ी करने के लिए जैसे ही गेट खोला तो मैंने देखा की अंदर पड़ोस वाली वो सुंदर महिला मेरी माँ से बात कर रही है, मैंने बाइक अंदर खड़ी की और सामने कमरे की तरफ जाने लगा तो मेरी मम्मी उस पड़ोसन से बोली ”आ गया बेटा मेरा, ये है मेरा बड़ा बेटा, काम पे से आ रहा है। ”
वो पड़ोसन पलट कर मेरी तरफ देखती है, मैं उसकी तरफ देखत हूँ, और वो इस तरह से मुझे देखती है की कुछ देर उससे नजरे मिलने के बाद मैं ही शर्मा कर नजरे चुरा लेता हूँ। उसने सूट पहना हुआ है और माथे पर बिंदी लगी है छोटी लाल रंग की और मांग मे बहुत हल्का सिंदूर केवल टच कर रखा है। वो पड़ोसन वास्तव मे इतनी सुंदर लग रही थी की शब्दों मे बया नहीं किया जा सकता।
मेरी मम्मी मुझसे बोलती है ‘‘बेटा जानता ये भाभी है, बगल वाला घर इनका ही है, ये ही मोहल्ले मे मुझसे पहले मिलने आई थी, आज इसने पाव भाजी बनाई है, तो वो लेकर आई है।”
मैं पड़ोसन की तरफ देख कर ”Thank you भाभी।।”
वो पड़ोसन मेरी तरफ देखती है और बोलती है- ”पहले खा कर बताना कि कैसी बनी है! फिर Thank you बोलना।”
फिर मैं भी बोल पड़ा उसकी ओर देख कर ‘‘अगर आपने अपने हाथों से बनाई है तो अच्छी होगी, और आपकी तरह टेस्टी भी। ”
पड़ोसन तेड़ी नजर से- ”क्या!!”
मैं कुछ बोलता उससे पहले मेरी मम्मी बोल पड़ती है ”हाँ, तेरी भाभी खाना बहुत अच्छा बना लेती है, ये तो हम ही पुराने जमाने के है की नई नई चीज बनानी नहीं आती। ”
पड़ोसन मम्मी से बोलती है ”आंटी जी चिंता मत करो, सिख दूँगी आपको। ”
मेरी मम्मी बोल पड़ती है ”अरे अब क्या सीखूँगी! अब तो इनकी बहूएं आएंगी और वो ही बनाया करेंगी। ”
तो पड़ोसन मेरी तरफ एक नजर देखती है पहले फिर मेरी मम्मी की तरफ देख कर बोलती है- ”आंटी जी मैं भी तो तुम्हारी बहूँ ही हूँ की नहीं !! मुझे बताओ की इनको क्या पसंद है मैं ला कर खिला दिया करूंगी। ”
मम्मी बोलती है ”अरे ना, तेरी आदत तो मुझे बहुत अच्छी लगी, मैं ही ना तुझे कुछ खिला पाई, वरना तू तो कितनी बार बना कर दे गई। ”
पड़ोसन – ”आंटी तुम भी तो कई बार मेरे घर पर दे कर गई हो समान। ”
मम्मी ”अरे लकिन वो तो बाहर के बने हुए थे ना, मैंने घर पर तो बना कर नहीं दिए, चल आबकी बनाऊँगी तो तेरी लिए भेजूँगी।”
पड़ोसन ”ठीक है आंटी जी, अब मैं चलती हूँ, ये(पड़ोसन का पति) भी आते ही होंगे। ”
फिर मेरी ओर देखती हुई गेट की ओर जाती हुई मुझसे बोलती है ”आप की खा लो, अभी गरम-गरम है,, और खा कर बताना जरूर की ”टेस्ट” कैसा था!!”
और मेरी मम्मी को आँटी नमस्ते बोलती हुई जाती है, और बाहर के गेट खोल कर बाहर निकलती है और गेट बंद करने के बहाने पलट कर मुझे फिर से देखती है और चली जाती है।